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प्रधानमंत्री द्वारा योजनाए ....


प्रधानमंत्री जन-धन योजना - 28 अगस्त 2014
डिजिटल इंडिया - 21 अगस्त 2014
मेक इन इण्डिया - 25 सितम्बर 2014
स्वच्छ भारत मिसन - 2 अक्टूबर 2014
सांसद आदर्श ग्राम योजना - 11 अक्टूबर 2014
श्रमेव जयते - 16 अक्टूबर 2014
जीवन प्रमाण(पेंसन भोगियों के लिए) - 10 नवम्बर 2014
मिसन इंद्र धनुष(टीकाकरण) - 25 दिसम्बर 2014
निति(NITI) आयोग - 1 जनवरी 2015
पहल(प्रत्यक्ष हस्तांतरण) - 1 जनवरी 2015
ह्रदय(समृध्दसांस्कृतिक विरासत संरक्षण व कायाकल्प) - 21 जनवरी 2015
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ - 22 जनवरी 2015
सुकन्या समृध्धि योजना - 22 जनवरी 2015
मृदा स्वास्थ कार्ड - 19 फरवरी 2015
प्रधानमंत्रीकौशल विकाश - 20 फरवरी 2015
प्रधानमंत्रीजीवन ज्योति - 9 मई 2015
प्रधानमंत्रीसुरक्षा बीमा - 9 मई 2015
अटल पेंसन योजना~9 मई 2015
उस्ताद(usttad)(अल्पसंख्यक कारीगर) - 14 मई 2015
कायाकल्प(जन स्वास्थ) - 15 मई 2015
डीडी किसान चैनल - 26 मई 2015

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महात्मा गाँधी और हरिजन उत्थान Mahatma Gandhi and Harijan uplift

  गाँधी जी ने हरिजन उत्थान के लिए अपना बहुमूल्य योगदान दिया। प्रसिद्ध 'पूना समझौते' के बाद गाँधी जी ने अपने आपको पूरी तरह से हरिजनों की सेवा में समर्पित कर दिया। जेल से छूटने के बाद उन्होंने 1932 ई. में 'अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग' की स्थापना की। गाँधी जी का कथन अन्य शुद्धि के लिए उपवास के दौरान गाँधी जी ने कहा कि "या तो छुआछूत को जड़ से समाप्त करो या मुझे अपने बीच से हटा दो। यह मेरी अंतरात्मा की पुकार है, चेतना का निर्देश है।" जनवरी 1933 ई. में गाँधी जी ने 'हरिजन' नामक साप्ताहिक पत्र का भी प्रकाशन किया। उन्हें एम.सी. राजा जैसे हरिजनों का समर्थन प्राप्त था। उन्होंने हरिजनों के लिए जगहों के आरक्षण के साथ एक ही निर्वाचक मण्डल की इच्छा ज़ाहिर की। लेकिन अम्बेडकर के नेतृत्व ने इसी स्वीकार नहीं किया। अम्बेडकर ने ऐसी प्रणाली को मानने से इंकार कर दिया, जिनमें हरिजनों को हिन्दू तो कहा जाता था, किन्तु उन्हें अस्पृश्य माना जाता था। पूना समझौता मुख्य लेख : पूना समझौता अनशन के कारण गाँधी जी का स्वास्थ्य काफ़ी तेज़ी से गिरने लगा था। मदन मोहन मालवीय, डॉक्टर राज...

Atmosphere in Hindi ||वायुमंडल की परिभाषा||

वायुमंडल की परिभाषा पृथ्वी के चारों और लिपटा हुआ गैसों का विशाल आवरण (giant cover of gases) जो पृथ्वी का अखंड अंग है और उसे चारों तरफ से घेरे हुए हुए है, वायुमंडल (Atmosphere) कहलाता है. जलवायु वैज्ञानिक क्रिचफिल्ड के अनुसार वायुमंडल अपने वर्तमान स्वरूप में 58 से 50 करोड़ वर्ष पूर्व अर्थात् कैम्ब्रियन युग  (Cambrian era) में आया. वायुमंडल का भार 5.6×10 25  टन है एवं इसके भार का लगभग आधा भाग धरातल से 5500 किमी. की ऊँचाई पर पाया जाता है. आधुनिक अनुसंधानों से स्पष्ट होता है कि वायुमंडल की अंतिम ऊँचाई (विस्तार) 16 हजार कि.मी. से 32 हज़ार किलोमीटर के बीच है. वायुमंडल का 50% भाग इसके 5 1/2 कि.मी. की ऊँचाई तक, 75% भाग 16 कि.मी. के ऊँचाई तक एवं 99% भाग 32 कि.मी. ऊँचाई तक स्थित है. वायुमंडल का संगठन वायुमंडल का संगठन/संघटन (Composition of atmosphere) निम्नलिखित तत्वों से हुआ है  – गैस (Gases) भौतिक दृष्टि से वायुमंडल विभिन्न गैसों का सम्मिश्रण है. 10 प्रमुख गैस वायुमंडल के संगठन/संघटन (atmosphere composition) के सन्दर्भ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं – गैसें ...

गाँधी-इरविन समझौता Gandhi-Irwin Pact

गाँधी-इरविन समझौता 5 मार्च, 1931 ई. को हुआ था। महात्मा गाँधी और लॉर्ड इरविन के मध्य हुए इस समझौते को 'दिल्ली पैक्ट' के नाम से भी जाना जाता है। गाँधी जी ने इस समझौते को बहुत महत्त्व दिया था, जबकि पंडित जवाहर लाल नेहरू और नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने इसकी कड़ी आलोचना की। कांग्रेसी भी इस समझौते से पूरी तरह असंतुष्ट थे, क्योंकि गाँधी जी भारत के युवा क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी के फंदे से बचा नहीं पाए थे। इरविन का प्रयास लॉर्ड इरविन ने भारत सचिव के सहयोग से इंग्लैण्ड में 12 सितम्बर, 1930 ई. को 'प्रथम गोलमेज सम्मेलन' का आयोजन करने का फैसला किया। कांग्रेस ने अपने आप को इस सम्मेलन से अलग रखने का निर्णय किया। इरविन ने 26 जनवरी, 1931 ई. में गाँधी जी को जेल से रिहा करके देश में शांति व सौहार्द का वातावरण उत्पन्न करने की कोशिश की। तेज़बहादुर सुप्रू एवं जयकर के प्रयासों से गाँधी जी एवं इरविन के मध्य 17 फ़रवरी से दिल्ली में वार्ता प्रारम्भ हुई। 5 मार्च, 1931 ई. को अन्ततः एक समझौते पर हस्ताक्षर हुआ। इस समझौते को "गाँधी-इरविन समझौता' कहा गया। समझौते की श...